Friday, December 19, 2008

ठुमक चलत रामचंद्र by Ronu Mujumdaat in Sawai Gandharv Mahotsav 2008


In Sawai Gandharv Mahotsav, Great Ronu Mujumdar has played the following Ram Bhajan on his magnificant flute.

I can never forget that scene, those notes are still playing in my ears.

ठुमक चलत रामचंद्र
ठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियां ..

किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय .
धाय मात गोद लेत दशरथ की रनियां ..

अंचल रज अंग झारि विविध भांति सो दुलारि .
तन मन धन वारि वारि कहत मृदु बचनियां ..

विद्रुम से अरुण अधर बोलत मुख मधुर मधुर .
सुभग नासिका में चारु लटकत लटकनियां ..

तुलसीदास अति आनंद देख के मुखारविंद .
रघुवर छबि के समान रघुवर छबि बनियां ..


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